खबर रखती है तेरी हर बार,
हर एक के बारे में बहुत कुछ लिखती हैं,
अच्छी लगी तो तारीफ करती है,
और बुरी लगी तो बदनाम कर देती है,
उसकी कलम ही ताकत है,
उसकी खबर ही भूक है,
तरसते हैं सारे लोग उसको लेने में,
उसके ही लिखावट से हर एक को सबकी खबर मिलती हैं,
जोखिम हैं इसके हर पहलू में,
दिल में इसके डर हर वक्त रहता है,
पर किसका सच या किसका झूट,
कहलाने में घबराती नहीं है,
इसे इसी सोच के वजह से
इसे अखबार कहते हैं,
इसे अखबार कहते हैं।

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