सोच!

देख लिया है मैने तुम्हें युही शर्माना मत।

मैं भी इन्सान ही हूं किसकी आगे सिर झुकाना मत।

हर किसीको खुद पर गर्व रहना चाहिए,

मैं आदमी और तुम औरत हो इसलिए खुदको नीचा दिखाना मत।

औरत के बिना आदमी है अपनी सोच बदलना मत।

जितना हक उसका उतना तुम्हारा है,

हर किसीको तुम्हे ये बतलाना है,

सुन ना पाए तो खुदको और बदल ले,

तुम्हे खुदको और तैयार करना है,

जाके कह दे… ए सुन…. सुन मैने ठानली है,

मुझे भी आगे बढ़ना है ये पर्वत पार करना है,

उड़ ना सकी तो मुझे तैरकर जाना है,

डूब भी गई तो क्या…. मुझे हौसला नहीं छोड़ना है,

सुना…. ये तुम्हे बदलाव लाना है,

हर राह पर सुलझाव लाना है,

तुम्हे पहले खुदका निडर बनना है,

कोई और मोड़ आएंगे तुम्हे गुमराह कर देंगे,

किसी के सामने खुदके लिए गिड़गिड़ाना मत।

हर वक्त दिल को कहते रहना है “तू डर मत”।

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